Friday, 30 June 2017



एक औरत की डायरी से / उमा झुनझुनवाला

दिनांक - हरदम
 
तुम हमेशा कहते हो और कहते जाते हो....ज़िन्दगी की सच्चाई पर इतना लम्बा भाषण मैंने अब तक न तो किसी से सुना है और न ही पढ़ा l लेकिन तुम्हे सुनना अच्छा लगता है इसलिए सुनती चली जाती हूँ.....l अब तो मेरी दीवारों को भी तुम्हारे शब्द याद हो गए l दीवारों का शब्दों का अर्थ समझने का मतलब समझ रहे हो न...l
लेकिन आँखों देखा या कानो सुना या स्पर्श या सिर्फ स्वाद या महक ---
अलग अलग सत्य होने के बावजूद अक्सर अधुरा सत्य होते हैं--
अपने आप में पूर्ण नहीं भी होते हैं।
एक इन्द्रिय का सच पूरा सच नहीं होता..........
पाँचों इन्द्रियाँ जब कुछ महसूस करती हैं--एक साथ---
तो वो "परमात्मा 'को महसूस करना होता है
----------------सत्य होता है
-------पूरा सत्य---
मेरी समस्त इन्द्रियाँ तुम्हे महसूस करती रहती है "परमात्मा सा" हरदम







Image result for रात चाँद और खिड़की
पिछली रात सोचा था
रखेंगे एक टुकड़ा चाँद का
अपने तकिये के नीचे

सुबह आँख खुली तो
गालों पे अंकित था
पूरा का पूरा चाँद